बांकीपुर सीट पर ‘जन सुराज’ का जलवा, शुरुआती बढ़त के साथ आगे निकले प्रशांत किशोर

0
8
Prashant Kishor
Prashant Kishor

पटना: बिहार की सियासत में सोमवार का दिन दिलचस्प रहा। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर, जो अब तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचाने जाते थे, अब खुद मैदान में उतरे हैं और चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक बांकीपुर विधानसभा सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं। पहले राउंड की गिनती में प्रशांत किशोर को 2,225 वोट मिले जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा 1,363 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। दोनों के बीच फासला 862 वोटों का बना। तीसरे स्थान पर राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता रहीं, जिन्हें महज 505 वोट मिले और वे किशोर से 1,720 वोट पीछे छूट गईं। 

शुरुआती रुझानों में बढ़त

बांकीपुर सीट खाली हुई थी नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। 30 जुलाई को हुए मतदान के नतीजे अब यह तय करेंगे कि क्या प्रशांत किशोर अपनी रणनीति खुद अपने लिए भी उतनी ही कारगर साबित कर पाते हैं, जितनी उन्होंने वर्षों तक दूसरे नेताओं के लिए बनाई। 

पहले राउंड की गिनती में किशोर को 2,225 वोट मिले जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा 1,363 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। 

दतिया और मंजलपुर में भी सरगर्मी

बिहार से इतर मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर सीटों पर भी उपचुनाव की गिनती जारी है। दतिया में मुख्य टक्कर भाजपा के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच है, जहां मतदान के दिन 71.44 प्रतिशत वोटिंग दर्ज हुई थी। गौरतलब है कि 2023 के चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भार्ती ने भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को साढ़े सात हजार से ज्यादा वोटों से हराया था, लेकिन एक धोखाधड़ी मामले में दिल्ली की अदालत से सजा मिलने के बाद भार्ती की सीट खाली हो गई। भाजपा ने इस बार मिश्रा को टिकट न देकर तिवारी पर भरोसा जताया, जिसका मिश्रा समर्थकों ने जमकर विरोध भी किया।

उधर गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन से खाली हुई थी। यहां भाजपा के सतीश गोविंदभाई पटेल का मुकाबला कांग्रेस के भीखाभाई राबारी से है। 260 बूथों पर 37.5 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2022 में योगेश पटेल ने यह सीट एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीती थी, ऐसे में इस बार भाजपा के लिए यह सीट बचाना भी एक चुनौती बनी हुई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here