नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गुरुवार को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें कम से कम 11 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य घायल हो गए. यह हमला अफगानिस्तान सीमा के करीब हंगू जिले की खजीना पुलिस चौकी पर किया गया. सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच करीब एक घंटे तक चली मुठभेड़ में 15 आतंकवादी भी मारे गए. हालांकि, अब तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
भारी हथियारों से किया गया हमला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों ने पुलिस चौकी पर भारी हथियारों के साथ हमला बोला. हमले की सूचना मिलते ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया, लेकिन रास्ते में उनके काफिले पर भी घात लगाकर हमला किया गया. इस दौरान एक बख्तरबंद वाहन को भी नुकसान पहुंचा. इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई आतंकियों को मार गिराया.
TTP पर गहराया शक
हालांकि किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस हमले के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का हाथ होने की आशंका जताई है. पाकिस्तान सरकार इस प्रतिबंधित संगठन को “फितना अल खवारिज” नाम से संबोधित करती है. हाल के महीनों में TTP पर सुरक्षा बलों को लगातार निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं.
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने की निंदा
हमले के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी कड़ी निंदा की. प्रधानमंत्री ने कहा कि पुलिस आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की पहली पंक्ति में खड़ी है और सरकार देश से हर प्रकार के आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं, गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी घटना की निंदा करते हुए खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए.
लंबे समय से अशांति का केंद्र बना है इलाका
खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों, अफगान सीमा से होने वाली घुसपैठ और सैन्य अभियानों के कारण अशांत बना हुआ है. पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि नवंबर 2022 में युद्धविराम समाप्त होने के बाद से TTP ने इस क्षेत्र में हमलों की संख्या बढ़ा दी है. हाल ही में टैंक जिले में भी एक सुरक्षा चौकी पर हमला हुआ था. ताजा घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और सीमा क्षेत्रों में बढ़ते आतंकवादी खतरे को उजागर कर दिया है.












