
नई दिल्ली: देशभर में पेपर लीक को लेकर उठे विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक विरोधी (संशोधन) विधेयक पेश किया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में रखा. बता दें, इसका उद्देश्य परीक्षा में होने वाली धांधली पर सख्त कार्रवाई, जांच प्रक्रिया में तेजी और दोषियों को जल्द सजा दिलाना है.
सजा और जुर्माना बढ़ाने की तैयारी
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक के मामलों में सजा को पहले से कहीं अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव है. जहां मौजूदा कानून में तीन से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है, वहीं नए विधेयक में इसे बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक करने की तैयारी है.
मामले की सुनवाई को लेकर भी दिया ये प्रस्ताव
विधेयक में हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, ताकि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई रोजाना हो सके और 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाया जा सके. इसके साथ ही जांच एजेंसियों के लिए भी दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है. वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार वीडियो संदेशों के जरिए छात्रों से संवाद कर रहे हैं. उन्होंने हाल ही में नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है. यह समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीक आधारित सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देगी.
गड़बड़ी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ कार्रवाई भी तेज कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और परीक्षा की जांच के लिए विशेष जांच तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी.











