‘माँवां धियां सत्कार योजना’ बनी महिलाओं की नई उम्मीद, परिवारों को मिल रही आर्थिक राहत

0
9
Bhagwant Mann
Bhagwant Mann

चंडीगढ़: भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना’ राज्य की पात्र महिलाओं को ऐसे समय में आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, जब बढ़ते घरेलू खर्च, कॉलेज में दाखिले की लागत और महंगाई परिवारों के बजट पर लगातार दबाव बना रहे हैं. 25 जून 2026 तक पंजीकरण पूरा करने वाली करीब 33 लाख महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है, जबकि शेष पात्र महिलाओं को यह राशि 1 अगस्त को जारी की जाएगी. अब तक राज्य की लगभग 70 लाख महिलाओं ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है.

योजना के लाभार्थियों के प्रोफाइल से स्पष्ट होता है कि यह आर्थिक सहायता उन महिलाओं तक पहुंच रही है, जिन पर परिवार की सबसे अधिक जिम्मेदारियां होती हैं. कुल लाभार्थियों में 36-45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की हिस्सेदारी 25.2 प्रतिशत, जबकि 46–59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं की हिस्सेदारी 25.4 प्रतिशत है. यानी योजना के 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी 36 से 59 वर्ष की आयु के हैं.

जीवन के इसी दौर में परिवारों पर सबसे अधिक आर्थिक जिम्मेदारियां होती हैं. परिवारों को बच्चों की शिक्षा, कॉलेज में दाखिला, विवाह, स्वास्थ्य सेवा, मकान, लोन की किश्तें, बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल और अपने भविष्य की योजना जैसी अनेक जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. ऐसे समय में हर रुपये का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है. ऐसे समय में मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना के तहत मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता महिलाओं को परिवार के ख़र्चों में सीधे योगदान देने और आवश्यक ज़रूरतों का बोझ कम करने में मदद कर रही है. कई परिवारों के लिए यह सहायता शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़मर्रा के घरेलू ख़र्चों का एक महत्त्वपूर्ण सहारा बन गई है.

बच्चों की पढ़ाई में मिली मदद: सुनीता रानी

फाजिल्का जिले के गांव धानी खरासवाली की 48 वर्षीय सुनीता रानी ने बताया कि इस मासिक सहायता से उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा, “मेरी बेटी बी.टेक की पढ़ाई कर रही है और बेटा ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता है. मैंने इस राशि का अधिकांश हिस्सा बेटे की स्कूल फ़ीस भरने में लगाया और बाकी पैसे अपने पति को दे दिए. गृहिणी होने के कारण मेरी अपनी कोई आय नहीं है, इसलिए इस सहायता से मुझे परिवार की ज़रूरतों में योगदान देने का संतोष मिला है. मेरे पति भी इस सहयोग से बहुत ख़ुश हैं. पहले हमें मुफ़्त बिजली मिली, फिर 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिला और अब यह मासिक आर्थिक सहायता मिल रही है. सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएँ शुरू की हैं.”

उन्होंने कहा कि इस सहायता से आर्थिक तनाव कम हुआ है और बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी रखने में मदद मिली है.

पति के निधन के बाद बड़ी राहत बनी योजना

फिरोजपुर के वार्ड नंबर 17 की 55 वर्षीय पच्छो के लिए यह योजना जीवन के बेहद कठिन दौर में बड़ी राहत लेकर आई है. अपने पति के निधन के बाद वह अपनी तलाकशुदा बेटी और नाती के साथ रहती हैं तथा लंबे समय से ख़राब स्वास्थ्य और सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही हैं. उन्होंने कहा, “मैंने इस राशि का कुछ हिस्सा अपने इलाज पर ख़र्च किया और बाकी घरेलू जरूरतों के लिए बचाकर रख लिया. मेरे पति का कई वर्ष पहले निधन हो गया था और तब से हम कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं. भगवंत मान सरकार की यह सहायता हमारे लिए बहुत बड़ा सहारा बनी है.”

उन्होंने बताया कि इस आर्थिक सहायता से वह अपने नाती की स्कूल फ़ीस भी भर सकीं. योजना के लिए कई लोगों का आवेदन करवाने में मदद करने वाली पच्छो ने ख़ुशी जताई कि इससे अनेक ज़रूरतमंद परिवारों को लाभ मिला है.

रोजमर्रा के खर्चों से लेकर बेटे के खेल तक में मिल रही मदद

सेल्फ हेल्प ग्रुप की सदस्य 46 वर्षीय करमजीत कौर ने बताया कि यह मासिक सहायता उन्हें रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के साथ-साथ परिवार के भविष्य पर भी खर्च करने का अवसर दे रही है. उन्होंने कहा, “मैं तां इस पैसे नाल अपनी ऐनक बनवाई ते स्कूटी विच पेट्रोल पुआ लिया. (मैंने इस पैसे से अपना नया चश्मा बनवाया और अपनी स्कूटी में पेट्रोल डलवाया.)” उन्होंने आगे कहा,”आने वाले महीनों में मैं इस राशि का उपयोग अपने बेटे के खेल संबंधी ख़र्चों के लिए करूँगी. वह राष्ट्रीय स्तर का हॉकी खिलाड़ी है.”

पूर्व कबड्डी खिलाड़ी करमजीत कौर ने आम परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाली जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की.

स्कूल फीस भरने में मिला सहारा

फाजिल्का की 28 वर्षीय लाभार्थी प्रीति, लोगों के घरों में काम करती हैं और अपने दो स्कूली बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. उन्होंने कहा कि यह सहायता ऐसे समय मिली है जब बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च उठाना लगातार मुश्किल होता जा रहा था. उन्होंने कहा, “इस पैसे से हमने अपने बच्चों की स्कूल फ़ीस भरी. यह सहायता बिल्कुल सही समय पर मिली है और इससे हमारा आर्थिक बोझ काफ़ी कम हुआ है.”

इलाज के खर्च में भी मिली राहत

इसी प्रकार, विधवा बलजीत कौर ने बताया कि इस मासिक सहायता से वह अपने चिकित्सा संबंधी ख़र्च पूरे कर सकी हैं, जिन्हें वह पहले वहन करने में कठिनाई महसूस कर रही थीं. इससे उन्हें काफी आर्थिक राहत मिली है.

पंजाब के विभिन्न ज़िलों से सामने आ रहे लाभार्थियों के अनुभव मुख्यमंत्री माँवां धियां सत्कार योजना के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं. यह योजना समय पर आर्थिक सहायता के माध्यम से महिलाओं को घरेलू ज़िम्मेदारियाँ निभाने, परिवार का सहयोग करने और बढ़ते आर्थिक दबाव के दौर से बेहतर ढंग से उबरने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here