न्यूजीलैंड मे पीएम मोदी का, माओरी जनजाति की पारंपरिक रस्म से हुआ भव्य स्वागत

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PM Narendra Modi
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड पहुंचते ही वहां जो दृश्य देखने को मिला, उसने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. ऑकलैंड में उनका स्वागत न्यूजीलैंड की मूल निवासी माओरी समुदाय की पारंपरिक और पवित्र पोविरी रस्म से किया गया. यह सिर्फ एक औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि सम्मान, भरोसे और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है.

दिलचस्प बात यह है कि यही माओरी संस्कृति पिछले साल भी वैश्विक चर्चा में रही थी, जब न्यूजीलैंड की संसद में युवा सांसद हाना रावहिती मापी क्लार्क ने एक विधेयक के विरोध में पारंपरिक हाका नृत्य किया था. उनका जोशीला प्रदर्शन सोशल मीडिया पर लंबे समय तक वायरल रहा. अब उसी संस्कृति के सबसे खास अनुष्ठान से पीएम मोदी का स्वागत किया जाना भारत और न्यूजीलैंड के बढ़ते रिश्तों का मजबूत संदेश माना जा रहा है.

क्या है माओरी ‘पोविरी’?

माओरी परंपरा में पोविरी केवल स्वागत समारोह नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक पवित्र प्रक्रिया है. इसका उपयोग खास मेहमानों के सम्मान में किया जाता है. माओरी मान्यता के अनुसार कोई बाहरी व्यक्ति तब तक पूरी तरह अपना नहीं माना जाता, जब तक यह रस्म पूरी न हो जाए. इस अनुष्ठान का उद्देश्य मेजबान और अतिथि के बीच मौजूद दूरी को खत्म करना और विश्वास का रिश्ता बनाना होता है. इसके जरिए यह संदेश दिया जाता है कि मेहमान सुरक्षित है और अब वह समुदाय का सम्मानित हिस्सा माना जाता है.

कई चरणों में होता है स्वागत

पोविरी की पूरी प्रक्रिया कई हिस्सों में बंटी होती है और हर चरण का अपना अलग महत्व होता है.

करंगा- सबसे पहले माओरी महिलाएं ऊंचे सुर में पारंपरिक आवाज लगाती हैं, जिसे करंगा कहा जाता है. यह मेहमानों को आगे आने का निमंत्रण होता है.

वाइकेरो- इसके बाद माओरी योद्धा पारंपरिक हथियारों के साथ सामने आते हैं और जमीन पर एक प्रतीकात्मक वस्तु रखते हैं. यदि मेहमान उसे उठा ले, तो इसका अर्थ होता है कि वह शांति और सम्मान के साथ आया है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस रस्म को पूरे आदर के साथ निभाया.

हाका- फिर माओरी समुदाय का प्रसिद्ध हाका नृत्य होता है. इसमें चेहरे के भाव, ऊंची आवाज और तालबद्ध हरकतों के जरिए ऊर्जा और साहस का प्रदर्शन किया जाता है. यही हाका न्यूजीलैंड की रग्बी टीम भी मैच से पहले करती है.

हौंगी- अंत में हौंगी की रस्म होती है, जिसमें मेजबान और अतिथि अपनी नाक और माथा एक-दूसरे से छूते हैं. माओरी मान्यता के अनुसार इससे दोनों के बीच “जीवन की सांस” का आदान-प्रदान होता है और आत्मिक संबंध स्थापित होता है.

संसद में हाका से मची थी चर्चा

माओरी संस्कृति का यह जोशीला रूप दुनिया पहले भी देख चुकी है. नवंबर 2024 में न्यूजीलैंड की संसद में युवा सांसद हाना क्लार्क ने एक विवादित स्वदेशी संधि विधेयक का विरोध करते हुए जोरदार हाका किया था. उन्होंने बहस के दौरान विधेयक की प्रति फाड़ दी और पारंपरिक अंदाज में नृत्य शुरू कर दिया. उनके साथ कई विपक्षी सांसद भी शामिल हो गए थे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी. यह वीडियो दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया था.

भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी का पोविरी से स्वागत केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था. इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे, सम्मान और साझेदारी के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है. न्यूजीलैंड ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक रस्म के जरिए भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत कर यह संकेत दिया कि दोनों देशों के संबंध अब और गहरे होते जा रहे हैं. माओरी संस्कृति की यह झलक एक बार फिर दुनिया के सामने आई और इसने यह दिखाया कि परंपराएं केवल इतिहास नहीं होतीं, बल्कि देशों और लोगों को जोड़ने का मजबूत माध्यम भी बन सकती हैं.

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