TMC में कलह, 20 से अधिक सांसदों ने ओम बिरला को लिखा पत्र

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Mamta Benerjee
instagram/@mamataofficial

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है. तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती असंतुष्टि की चर्चाओं के बीच पार्टी के 20 से अधिक सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखे जाने की खबर ने नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को जन्म दे दिया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुछ सांसद पार्टी से अलग होकर नया समूह या अलग राजनीतिक मंच बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि लोकसभा में टीएमसी के भीतर एक अलग धड़ा उभर सकता है. हालांकि इस संबंध में अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का सामना करना पड़ रहा है. हाल ही में वरिष्ठ नेता सुखेन्दु शेखर रॉय के इस्तीफे ने इस विवाद को और हवा दे दी है. उनके पार्टी छोड़ने के बाद दिल्ली में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों का दौर शुरू हुआ, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया.

संभावित फेरबदल और नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू

सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में करीब 13 टीएमसी सांसदों ने दिल्ली में सुखेन्दु शेखर रॉय से मुलाकात की थी. इस बैठक के बाद पार्टी के भीतर संभावित फेरबदल और नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई. इसके बाद इन्हीं सांसदों के एक समूह ने कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की. बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद थे. हालांकि, इन बैठकों को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

बताया जा रहा है कि जिन सांसदों के नाम इस पूरे घटनाक्रम से जोड़े जा रहे हैं, उनमें प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, जगदीश चंद्र बसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, पार्थ भौमिक, बापी हलदर, शताब्दी रॉय, असित कुमार मल, जून मालिया, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान शामिल हैं. हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि सभी सांसद किसी नए राजनीतिक संगठन का हिस्सा बनेंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी.

सुखेन्दु शेखर रॉय के इस्तीफे से राजनीतिक माहौल गर्म 

इस बीच, सुखेन्दु शेखर रॉय के इस्तीफे ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है. ममता बनर्जी को भेजे अपने पत्र में उन्होंने टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में विफलता और प्रशासनिक अव्यवस्था जैसे गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए. वहीं, उन्होंने भाजपा सरकार की कुछ नीतियों और विकास कार्यों की सराहना करते हुए राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है. इन घटनाओं के बाद बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव की संभावनाओं पर नजरें टिक गई हैं.

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