कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है. लंबे समय तक सत्ता में रही सरकार के बाद अब नई राजनीतिक तस्वीर उभर रही है, जिसने सियासी हलचल को तेज कर दिया है. चुनाव परिणाम सामने आते ही अब सभी की नजरें नई सरकार के गठन और शपथ ग्रहण समारोह की तारीख पर टिक गई हैं.
बता दें कि, भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए 9 मई की तारीख तय की है. यह दिन बंगाली पंचांग के अनुसार 25 बैशाख को पड़ता है, जिसे सांस्कृतिक रूप से भी खास माना जाता है. इस तारीख को चुनने के पीछे राज्य की परंपरा और पहचान से जुड़ाव दिखाने की कोशिश बताई जा रही है. बंगाल बीजेपी के राज्य अध्यक्ष समीख भट्टाचार्य ने इस बात की जानकारी दी.
ऐतिहासिक जीत के बाद तैयारी तेज
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने इस बार पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत हासिल की है. पार्टी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य की सत्ता अपने नाम की है. इसके साथ ही उसने पिछले 15 साल से चल रहे शासन का अंत कर दिया है. इस बड़ी जीत के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर नई सरकार के गठन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
अधिसूचना की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी 6 मई को राजपत्र अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इसके तहत राज्यपाल को औपचारिक रूप से परिणामों की जानकारी दी जाएगी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू होगी. यह कदम सरकार के गठन की दिशा में अहम माना जा रहा है.
शुरू होगी सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया
मतगणना पूरी होने और परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद अब सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होगी. यह एक महत्वपूर्ण चरण होता है, जिसमें वर्तमान सरकार से नई सरकार को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. नई सरकार बनने से पहले मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्यपाल से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगी. यह प्रक्रिया संविधान के तहत जरूरी होती है, जिससे नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होता है.
संवैधानिक नियमों के अनुसार, राज्यपाल ममता बनर्जी से यह अनुरोध कर सकते हैं कि वह नई सरकार के शपथ लेने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में पद पर बनी रहें. इससे प्रशासनिक कामकाज बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेगा और व्यवस्था में स्थिरता बनी रहेगी.














