अमेरिकी रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासा: पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी अभी भी महफूज

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अमेरिका की नवीनतम CRS रिपोर्ट ने पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब कर दिया है. रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत भारत-विरोधी आतंकी संगठन पाकिस्तानी धरती पर बिना किसी रोक-टोक के अपना पूरा नेटवर्क चला रहे हैं. यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. CRS रिपोर्ट में भारत और जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने वाले कई आतंकी गुटों की सक्रियता का विस्तार से जिक्र किया गया है.

CRS रिपोर्ट का बड़ा खुलासा
अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस की जारी एक रिपोर्ट में 15 प्रमुख आतंकी संगठनों का विस्तृत वर्णन है. इनमें कई को अमेरिका ने ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’  घोषित किया हुआ है. रिपोर्ट भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों से लगातार बने खतरे की ओर इशारा करती है.

मुख्य भारत-विरोधी आतंकी संगठनरिपोर्ट में जिन प्रमुख संगठनों का जिक्र है उनमें शामिल हैं-

लश्कर-ए-तैयबा (LeT)

जैश-ए-मोहम्मद (JeM)

हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)

हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)

हिज्बुल मुजाहिदीन (HM)

लश्कर-ए-तैयबा की स्थिति
1980 के दशक के अंत में बने इस संगठन को 2001 में FTO घोषित किया गया था. यह अभी भी पाकिस्तान के पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में जेल में बंद हाफिज सईद के नेतृत्व वाले इस गुट ने प्रतिबंधों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर जमात-उद-दावा कर लिया है. इसके पास कई हजार लड़ाके हैं और इसी संगठन ने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे.

जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियां
 साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित इस गुट को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था. इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम करते हैं. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैश ने खुले तौर पर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की हुई है.

हिज्बुल मुजाहिदीन का खतरा
1989 में बने इस कश्मीर-केंद्रित समूह को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था. इसके पास लगभग 1500 कैडर हैं जो कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय’ की मांग करते हैं. ये समूह अल-कायदा और भारतीय उपमहाद्वीप में इसके सहयोगी संगठन जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं.

पाकिस्तान की विफलता और मदरसों की भूमिका
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान आतंकी गुटों को खत्म करने में नाकाम रहा है. हवाई हमलों और लाखों ‘खुफिया-आधारित ऑपरेशनों’ सहित कई बड़े सैन्य अभियान, अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित इन आतंकवादी समूहों को हराने में विफल रहे हैं. 2014 के ‘नेशनल एक्शन प्लान’ का उद्देश्य भी इन गुटों को खत्म करना था, लेकिन ये आज भी मौजूद हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए थे, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांत पढ़ा रहे हैं जो हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे सकते हैं.

पाकिस्तान का दोहरा चरित्र
दक्षिण एशिया विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को ‘पीड़ित और समर्थक’ दोनों के रूप में चित्रित करती है. एक तरफ जहां इस्लामाबाद खुद घरेलू हिंसा से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेजबानी कर रहा है जो लंबे समय से भारत को निशाना बनाते आए हैं.

रिपोर्ट में आतंकी गुटों का वर्गीकरण
रिपोर्ट में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी और अन्य गुटों को पांच व्यापक, और अक्सर आपस में जुड़े हुए, वर्गों में बांटा गया है.

वैश्विक स्तर पर सक्रिय

अफगानिस्तान-केंद्रित

भारत और कश्मीर-केंद्रित

घरेलू स्तर पर सक्रिय

सांप्रदायिक (शिया-विरोधी)

भारत का साफ रुख
पाकिस्तान की इन गुटों को पूरी तरह से खत्म करने में अक्षमता या अनिच्छा के कारण पड़ोसियों के साथ उसका तनाव बना हुआ है. भारत लगातार इस बात पर कायम है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है. पाकिस्तानी धरती पर मौजूद आतंकी ढांचे के बारे में अमेरिका के इस ताजा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूती दी है.

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