H1B वीजा पर बड़ा हमला: अमेरिकी सांसद का बिल, भारतीयों की बढ़ी चिंता

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US plans to end H1B visa

नई दिल्ली: अमेरिका में काम कर रहे लाखों विदेशी पेशेवरों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. रिपब्लिकन पार्टी के प्रतिनिधि ग्रेग स्ट्यूबी ने H1B वीजा योजना को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से एक नया विधेयक पेश किया है. इस प्रस्ताव ने अमेरिकी राजनीति के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी हलचल मचा दी है.

इस कदम का सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि H1B वीजा पाने वालों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीयों की है. विधेयक सामने आते ही अमेरिकी श्रम बाजार, आव्रजन नीति और विदेशी कर्मचारियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है.

H1B वीजा खत्म करने के लिए लाया गया नया विधेयक

रिपब्लिकन प्रतिनिधि ग्रेग स्ट्यूबी ने सोमवार को अमेरिका की संसद में H1B वीजा योजना को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश किया. उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना अमेरिकी नागरिकों के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देती है, जिससे स्थानीय कर्मचारियों को नुकसान होता है. स्ट्यूबी ने कहा कि इससे अमेरिकी युवाओं और कामगारों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.

‘एक्साइल एक्ट’ क्या है?

इस प्रस्तावित कानून का नाम ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ है, जिसे संक्षेप में एक्साइल एक्ट कहा जा रहा है. इस विधेयक के तहत आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम में संशोधन कर H1B वीजा योजना को पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है.

स्ट्यूबी ने कहा,”अमेरिकी नागरिकों की भलाई और समृद्धि के बजाय विदेशी कामगारों को प्राथमिकता देना हमारे मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को कमजोर करता है. हमारे कर्मचारियों और युवाओं को H1B वीजा प्रोग्राम से लगातार बेघर किया जा रहा है. साथ ही उनको उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा.”

अमेरिकी सपने को लेकर स्ट्यूबी का तर्क

ग्रेग स्ट्यूबी ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा,”हम अपने बच्चों के लिए अमेरिकी सपने को तब तक सुरक्षित नहीं रख सकते जब तक हम उनका हिस्सा गैर-नागरिकों को देते रहेंगे. इसलिए मैं काम करने वाले अमेरिकियों को फिर से प्राथमिकता देने के लिए एक्साइल बिल पेश कर रहा हूं.”

विधेयक में क्या प्रावधान हैं?

स्ट्यूबी के कार्यालय के मुताबिक, एक्साइल एक्ट के तहत आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम के सेक्शन 214 (जी) (1) (ए) में बदलाव किया जाएगा. इसके अनुसार साल 2027 से हर वित्तीय वर्ष में जारी किए जाने वाले H1B वीजा की संख्या शून्य कर दी जाएगी, यानी यह योजना पूरी तरह समाप्त हो जाएगी.

क्या है H1B वीजा?

H1B वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीजा है. इसके जरिए अमेरिकी कंपनियों को तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और वित्त जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नौकरी देने की अनुमति मिलती है.

H1B वीजा योजना की शुरुआत क्यों हुई?

H1B वीजा योजना की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि विशेष योग्यता और तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी नागरिक अमेरिका में काम कर सकें. समय के साथ यह योजना भारत और चीन जैसे देशों के पेशेवरों के लिए अमेरिका में करियर बनाने का बड़ा जरिया बन गई. हालांकि, नौकरियों, वेतन और आव्रजन नीति को लेकर यह योजना लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय भी रही है.

भारतीय पेशेवरों पर सीधा असर

H1B वीजा का सबसे ज्यादा लाभ भारतीय प्रोफेशनल्स उठाते हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, H1B वीजा पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा भारतीय हैं, जिनमें बड़ी संख्या युवा आईटी और टेक कर्मचारियों की है. ऐसे में संसद में पेश यह विधेयक सीधे तौर पर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स के भविष्य को प्रभावित कर सकता है.

अभी बाकी है लंबी प्रक्रिया

H1B वीजा खत्म करने से जुड़ा यह विधेयक फिलहाल अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधिसभा में पेश किया गया है. अभी न तो इस पर बहस हुई है और न ही मतदान की कोई समयसीमा तय की गई है. विधेयक को अब संबंधित हाउस कमेटी के पास भेजा जाएगा, जहां यह तय होगा कि इस पर औपचारिक सुनवाई होगी या नहीं. प्रतिनिधिसभा से पास होने के बाद यह सीनेट में जाएगा.

वीजा फीस पहले ही बढ़ा चुकी है सरकार

ट्रंप सरकार ने पिछले साल 21 सितंबर से H1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दी थी. व्हाइट हाउस के मुताबिक यह बढ़ी हुई फीस वन टाइम है, जो आवेदन के समय देनी होगी. इससे पहले H1B वीजा की फीस 5.5 से 6.7 लाख रुपये के बीच थी, और यह वीजा तीन साल के लिए मान्य होता था.

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