नई दिल्ली। दिवाली के दिन 8 नवंबर 2026 की सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा और घनी धुंध की चपेट में आ गई। शहर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह 5 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। वहीं, कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया। दिवाली पर आतिशबाजी और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रोहिणी और पंजाबी बाग में सबसे ज्यादा प्रदूषण, कई इलाके गंभीर श्रेणी में
सुबह 5 बजे जारी निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच गई। रोहिणी में AQI 444 दर्ज किया गया, जबकि पंजाबी बाग में यह 450 तक पहुंच गया। इसके अलावा आरके पुरम में 449, आईआईटी दिल्ली में 446, द्वारका में 444, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 431, अलीपुर में 418, चांदनी चौक में 413 और विवेक विहार में 414 AQI रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से लगभग 16 से 22 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही, जबकि अधिकांश अन्य केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर बेहद खराब दर्ज किया गया। जहरीली धुंध के कारण कई इलाकों में दृश्यता भी प्रभावित हुई।
बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को घरों में रहने की सलाह
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने को कहा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जहरीली हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हृदय रोगियों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सुबह और शाम के समय, जब प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो N95 या इससे बेहतर गुणवत्ता वाला मास्क पहनें। घरों में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और खिड़कियां बंद रखें।
GRAP का तीसरा चरण लागू, निर्माण कार्यों पर लगाई गई रोक
बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर में 6 नवंबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू किया गया है। इसके तहत गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा दिल्ली में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल श्रेणी के चारपहिया वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। वहीं, शिक्षा विभाग ने कुछ क्षेत्रों के प्राथमिक स्कूलों को हाइब्रिड मोड में कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए हैं।
दिवाली पर सिर्फ ग्रीन पटाखों की अनुमति, समय सीमा भी तय
दिवाली पर आतिशबाजी को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति है। इसके लिए सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।
अस्पतालों, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और अन्य संवेदनशील स्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू हो जाएगा।
हालांकि, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बाजारों में अभी भी सामान्य पटाखों की अवैध बिक्री जारी है। ऐसे में निर्धारित नियमों का पालन करवाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। दिवाली के दौरान आतिशबाजी से प्रदूषण का स्तर और बिगड़ने की आशंका के चलते लोगों से पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की अपील की गई है।












