धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में उतरे वृंदावन के संत-महंत, बोले- बयान के आध्यात्मिक भाव को समझने की जरूरत

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वृंदावन: बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर उठे विवाद के बीच वृंदावन के संत-महंत और धर्माचार्य उनके समर्थन में उतर आए हैं। गुरुवार को राधाकांत मंदिर में आयोजित संत सभा में बड़ी संख्या में संतों ने एकजुट होकर बयान का समर्थन किया। उन्होंने विवाद को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि किसी भक्त द्वारा अपने आराध्य के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करना अपमान नहीं है। ऐसे बयानों को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।

आध्यात्मिक भाव समझने की जरूरत, बात का बतंगड़ बनाना अनुचित

ब्रज तीर्थ देवालय न्यास एवं धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सभा की अध्यक्षता करते हुए महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने कहा कि भक्त और भगवान के बीच भाव का संबंध होता है। धीरेंद्र शास्त्री ने जो कुछ कहा है, उसके आध्यात्मिक भाव को समझने की जरूरत है। किसी भी बात को उसके मूल भाव से अलग करके विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

त्रिभंगी स्वरूप का वर्णन अपमान नहीं, रसिक संतों की दिव्य परंपरा

भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन और दिव्य परंपरा का अभिन्न अंग है। भक्त कवियों, रसिक संतों और आचार्यों ने सदियों से भगवान के इस अलौकिक स्वरूप का वर्णन किया है। ऐसे में किसी भक्त द्वारा अपने आराध्य के स्वरूप का प्रेमपूर्वक वर्णन करना अपमान नहीं माना जाना चाहिए। अखाड़ा परिषद ब्रज प्रांत के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप पूरी दुनिया में पूजनीय है। रसिक संतों ने ठाकुरजी की बांकी चितवन, बांकी अदा और त्रिभंगी मुद्रा का सदैव प्रेमपूर्वक वर्णन किया है।

सनातन को जगा रहे धीरेंद्र शास्त्री, संतों ने दिया एकजुटता का संदेश

धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म और हिंदू समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। वहीं, ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन समाज को आपसी विवादों में अपनी ऊर्जा खर्च करने के बजाय धर्म, संस्कृति, मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए काम करना चाहिए। ब्रजभूमि से यही संदेश है कि सनातन समाज एकजुट रहे।

ब्रजभूमि में संतों का जुटान, बड़ी संख्या में धर्माचार्य रहे मौजूद

सभा में स्वामी देवानंद परमहंस, आरके पांडेय, रोहित रिछारिया, विनय त्रिपाठी, आचार्य सुमंत कृष्ण शास्त्री, पंकज चतुर्वेदी, महंत सुंदर दास महाराज, महंत दशरथ दास, स्वामी अतुल कृष्ण दास, पंडित बाबा बरसाने वाले, स्वामी रामदास, सुमित गौतम, आचार्य अनमोल, राम अभिलाष मिश्रा, आचार्य संगम, महंत मोहिनी बिहारी शरण, आचार्य यदुनंदन, आनंद बल्लभ गोस्वामी, शैलेंद्र कृष्ण और संजय हरियाणा सहित बड़ी संख्या में संत-महंत मौजूद रहे।

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