नई दिल्ली: आपदा का खतरा जब आंखों से दिखाई न दे और दुश्मन हवा पानी या वातावरण में छिपा हो, तब मुकाबला सिर्फ साहस से नहीं, बल्कि तकनीक, प्रशिक्षण और सूझबूझ से जीता जाता है। ऐसे ही अदृश्य खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की आठवीं बटालियन, गाजियाबाद में आयोजित दूसरी राष्ट्रीय राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) सीबीआरएन प्रतियोगिता-2026 का बुधवार को समापन हुआ। प्रतियोगिता में तमिलनाडु की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल कर चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता का समापन, 8 राज्यों की टीमों ने बनाई थी जगह
2 से 4 नवंबर तक चली इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के समापन समारोह में एनडीआरएफ के महानिदेशक पीयूष आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। देश के 19 राज्यों की एसडीआरएफ टीमों ने क्षेत्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। इनमें से राजस्थान, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात की आठ टीमों ने अंतिम मुकाबले में जगह बनाई।
तमिलनाडु एसडीआरएफ बनी चैंपियन, महानिदेशक ने दिया ‘टीम इंडिया’ का संदेश
कड़े मुकाबले के बाद तमिलनाडु एसडीआरएफ ने पहला स्थान हासिल कर एक लाख रुपये नकद और ट्रॉफी जीती। उत्तराखंड एसडीआरएफ दूसरे स्थान पर रही, जिसे 75 हजार रुपये और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं बिहार एसडीआरएफ ने तीसरा स्थान हासिल कर 50 हजार रुपये और ट्रॉफी अपने नाम की। समारोह को संबोधित करते हुए महानिदेशक पीयूष आनंद ने ‘टीम इंडिया’ की भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का उद्देश्य एक ही है—आपदा के समय लोगों की जान बचाना और संपत्ति की सुरक्षा करना। संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और अनुभवों के आदान-प्रदान से आपसी तालमेल तथा तकनीकी दक्षता मजबूत होती है।
सीबीआरएन आपदाओं से निपटने को निरंतर अभ्यास व प्रशिक्षण जरूरी
उन्होंने रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) आपदाओं को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि ये खतरे कई बार शुरुआती संकेत दिए बिना सामने आते हैं। ऐसे में नियमित अभ्यास और प्रशिक्षण ही बचावकर्मियों को त्वरित, सटीक और सुरक्षित कार्रवाई के लिए तैयार करते हैं। इस अवसर पर एनडीआरएफ के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला वरिष्ठ अधिकारी जवान मौजूद रहे।












