मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ट्रंप की बढ़ेंगी मुश्किलें, अब आगे अमेरिका की सियासत में क्या होगा?

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नई दिल्ली: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को करारी हार का सामने करना  पड़ा है। डेमोक्रेट्स ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ-साथ सीनेट में भी बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे को ट्रंप के राजनीतिक दबदबे के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। मतदाताओं ने महंगाई, ईरान नीति, इमिग्रेशन पर सख्ती और प्रशासन के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

ट्रंप 2024 में सस्ती कीमतों और अमेरिका को नए युद्धों से दूर रखने के वादे के साथ सत्ता में लौटे थे, लेकिन दो साल के अंदर ही उनकी पार्टी संसद के दोनों सदनों में बहुमत गंवा बैठी। अब सवाल यही है कि ट्रंप इस हार के बाद क्या रास्ता अपनाएंगे? क्या वे नीतियों में बदलाव करेंगे या विपक्ष से सीधे टकराव पर जाएंगे? आने वाले दो साल अमेरिकी राजनीति के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

जांच और नियुक्तियों में बढ़ेगी मुश्किल

नई कांग्रेस के काम संभालते ही ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ जाएगा। डेमोक्रेट्स के पास प्रशासन के फैसलों की जांच करने और जवाब मांगने की ताकत होगी। ईरान युद्ध, व्हाइट हाउस में कथित भ्रष्टाचार, ट्रंप परिवार के कारोबार, क्रिप्टो से जुड़े सौदों और सरकारी ठेकों की जांच हो सकती है। ट्रंप के करीबियों को भी समितियों के सामने पेश होना पड़ सकता है।

सीनेट में बहुमत मिलने से डेमोक्रेट्स सुप्रीम कोर्ट में खाली पद पर नियुक्ति और नए कैबिनेट मंत्रियों की पुष्टि में भी अड़ंगा लगा सकते हैं। यानी ट्रंप के पास राष्ट्रपति की शक्तियां तो रहेंगी, लेकिन अपनी नीतियां आगे बढ़ाना पहले से ज्यादा मुश्किल होगा।

ईरान युद्ध और महंगाई पड़ी भारी

हार की सबसे बड़ी वजह ईरान से टकराव और बढ़ती महंगाई मानी जा रही है। चुनाव से पहले पेट्रोल के दाम करीब 40 फीसदी बढ़ गए, जबकि डीजल लगभग दोगुना हो गया। इसका सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ा। टैरिफ नीति भी कई राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को भारी पड़ी। कनाडा से सटे राज्यों और खेती पर निर्भर इलाकों में पार्टी को नुकसान हुआ। चीन को बीफ और सोयाबीन निर्यात में आई गिरावट से किसानों की नाराजगी बढ़ी।

नतीजों के बाद ट्रंप ने विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की बात कही, लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने खुद को ‘मिस्टर वीटो’ बताया था। इसका मतलब है कि वे डेमोक्रेट्स के विधेयकों को रोक सकते हैं। ऐसे में बजट, ईरान युद्ध और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को हटाने की मांग जैसे मुद्दों पर टकराव बढ़ सकता है।

2028 की लड़ाई पर असर

इस हार का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ेगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस जैसे नेताओं के बीच उत्तराधिकार की चर्चा तेज हो सकती है। टेक्सास जैसे मजबूत रिपब्लिकन गढ़ में डेमोक्रेट जेम्स तालारिको की जीत ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।डेमोक्रेट्स के लिए भी राह आसान नहीं है। ट्रंप के वीटो की वजह से वे हर वादा पूरा नहीं कर पाएंगे। महंगाई पर राहत नहीं मिली तो 2028 में उन्हें भी मतदाताओं का गुस्सा झेलना पड़ सकता है।

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