अभियान के दौरान बड़ा संकट, झील में समाईं एसडीआरएफ की दो नौकाएं; दस जवानों का सुराग नहीं

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खम्मम जिले के सथुपल्ली मंडल में हुई इस घटना के बाद प्रशासन और बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार, बेथुपल्ली झील में पांच मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी एसडीआरएफ की टीम रवाना हुई थी। अभियान के दौरान मौसम और जलधारा की प्रतिकूल परिस्थितियों ने स्थिति को अचानक गंभीर बना दिया। तेज हवाओं तथा पानी के दबाव के बीच दल की दो नौकाएं संतुलन खो बैठीं और झील में पलट गईं।

इस दुर्घटना के बाद दस कांस्टेबलों से संपर्क टूट गया। उनकी तलाश के लिए गोताखोरों और अन्य प्रशिक्षित बचावकर्मियों को लगाया गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचकर अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

मछुआरों की मदद के लिए पहुंची टीम पर टूटा संकट

बताया जा रहा है कि झील में पांच मछुआरों के फंसे होने की सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ के जवान उन्हें निकालने के उद्देश्य से पानी में उतरे थे। इसी दौरान तेज हवा और जलस्तर में बने दबाव के कारण बचाव कार्य जोखिम भरा हो गया। दो नावों के पलटने से अभियान का पूरा स्वरूप बदल गया और प्राथमिकता लापता जवानों को खोजने पर केंद्रित हो गई। घटनास्थल पर मौजूद दल लगातार तलाश कर रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में लापता कर्मियों की स्थिति को लेकर कोई अंतिम पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को दिए तत्काल कार्रवाई के आदेश

दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मामले पर ध्यान दिया। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि लापता कर्मियों तक पहुंचने के लिए हर जरूरी संसाधन तत्काल जुटाया जाए। मुख्यमंत्री ने खम्मम के जिलाधिकारी को बचाव अभियान में तेजी लाने और जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी उपलब्ध व्यवस्थाएं करने को कहा है। मुख्य सचिव को भी घटनाक्रम पर लगातार नजर रखने तथा अधिकारियों से नियमित जानकारी लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मंत्री ने राहत अभियान की समीक्षा शुरू की

राज्य के राजस्व, आवास और जनसंपर्क विभाग के मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने भी दुर्घटना पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने बताया कि सरकार पूरे घटनाक्रम की जानकारी लगातार जुटा रही है। मुख्यमंत्री की ओर से जिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से काम करने के लिए कहा गया है। मंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि खोज अभियान में किसी प्रकार की देरी न हो और जरूरत के मुताबिक अतिरिक्त नावें तथा सुरक्षा से जुड़े उपकरण तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति देखेंगे मंत्री

मंत्री श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि वह जिलाधिकारी के संपर्क में हैं और बचाव कार्य की प्रगति की जानकारी समय-समय पर ले रहे हैं। उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर अभियान का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने की भी बात कही है। इसके लिए उन्होंने अगली सुबह मौके पर जाने का कार्यक्रम बताया। उनका कहना है कि इस समय सरकार का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य लापता एसडीआरएफ कर्मियों को सुरक्षित ढूंढना है।

गोताखोरों की टीम पर टिकी निगाहें

झील में लापता जवानों की खोज के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों और बचाव दलों की मदद ली जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से जरूरी संसाधन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। हादसे ने एक बार फिर दिखाया है कि जलाशयों में बचाव अभियान के दौरान मौसम, हवा और पानी की स्थिति कितनी बड़ी चुनौती बन सकती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें तलाश अभियान के नतीजों पर टिकी हैं।

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