नई दिल्ली: गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जेल में जिंदगी अब पहले से ज्यादा सख्त निगरानी के बीच गुजर रही है। उसे अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक ‘200 खोली’ में शिफ्ट किया गया है। इस हिस्से में आतंकवाद और दूसरे गंभीर अपराधों के दोषी या आरोपी कैदियों को रखा जाता है। यहां सुरक्षा इतनी कड़ी है कि कैदियों के बीच संपर्क और एक जगह से दूसरी जगह जाने की गुंजाइश बेहद सीमित रहती है।
साबरमती जेल के इस विशेष ब्लॉक को चार हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में 50 कैदियों को रखने की व्यवस्था है, ताकि उन्हें अलग-अलग रखा जा सके और उनकी गतिविधियों पर नजर बनी रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेंस की कोठरी करीब 7.5×11 फीट की है। इस ब्लॉक में 2008 के सीरियल ब्लास्ट मामले से जुड़े दोषियों सहित अन्य गंभीर अपराधों में शामिल कैदी भी बंद हैं। लॉरेंस को यहां रखने का मकसद उसकी गतिविधियों पर और सख्ती से नियंत्रण करना बताया जा रहा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, 2023-2024 से पहले वह जेल में रहते हुए भी रंगदारी के लिए फोन करने, धमकी भरे ऑडियो-वीडियो संदेश भेजने और इंटरव्यू देने के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा था। हालांकि, अधिकारियों के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में उसकी ओर से सीधे फोन या बातचीत की कोई घटना सामने नहीं आई है।
‘10 खोली’ से अब हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक में
इससे पहले लॉरेंस को ‘10 खोली’ नाम के छोटे सुरक्षा क्षेत्र में रखा गया था, जहां करीब 10 कैदियों के रहने की व्यवस्था है। वह इससे पहले तिहाड़ जेल और पंजाब की अलग-अलग जेलों में भी रह चुका है। उन दिनों कॉल सेंटर संचालकों को धमकी देने से जुड़ी रिकॉर्डिंग और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के साथ कथित बातचीत की खबरें सामने आई थीं। अब उसकी मुलाकातों और बाहरी दुनिया से संपर्क पर सख्त पाबंदियां हैं। बताया जाता है कि वह चौबीसों घंटे निगरानी में रहता है और अदालत की सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होता है। कानूनी मामलों पर चर्चा के लिए उसे अपने वकील से संपर्क की सुविधा मिलती है।
कैसी जिंदगी जी रहा है लॉरेंस बिश्नोई?
रिपोर्टों के अनुसार, लॉरेंस जेल में अनुशासित दिनचर्या का पालन करता है। वह सुबह ध्यान लगाता है, हनुमान चालीसा पढ़ता है, व्रत रखता है और शाकाहारी भोजन करता है। हालांकि, उसकी निजी दिनचर्या से जुड़ी इन जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट नहीं है। जेल में अलग-थलग रहने के बावजूद उसके गिरोह के विदेशों में सक्रिय रहने के दावे भी सामने आते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके करीबी गुर्गों का एक समूह बाहर से गिरोह के काम संभालता है। इसमें नए लोगों को जोड़ने, जिम्मेदारियां बांटने और जरूरी इंतजामों का तालमेल रखने जैसे काम शामिल बताए जाते हैं। हालांकि, जेल में लॉरेंस की मौजूदा स्थिति और गिरोह के संचालन से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।












