‘मेरे कृष्ण’ नाटक ने मोहा मन, श्रीकृष्ण की लीलाओं से गूंजा सभागार

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वृंदावन: मंच पर श्रीकृष्ण की जन्मलीला का दृश्य साकार हुआ तो सभागार में बैठे दर्शकों के चेहरे खिल उठे। बाल लीलाओं ने श्रद्धा और भक्ति का संचार किया तो कंस वध के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। महाभारत के महासंग्राम के बीच जब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया तो पूरा सभागार तालियों और जयकारों से गूंज उठा। रविवार शाम स्वामी हरिदास प्रेक्षागृह में ब्रजरज उत्सव के अंतर्गत आयोजित नाट्य प्रस्तुति ‘मेरे कृष्ण’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

सौरभ राज जैन के अभिनय से जीवंत हुईं श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, 20 दृश्यों में बंधी कथा

धारावाहिक महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता सौरभ राज जैन ने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर वृंदावन की बाल लीलाओं, कंस वध, द्वारिका के प्रसंगों और महाभारत के महासंग्राम तक की कथा को मंच पर जीवंत किया गया। करीब 20 दृश्यों में श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। अभिनय, संगीत और संवादों के तालमेल ने दर्शकों को कथा से जोड़े रखा।

130 से अधिक कलाकारों की भव्य प्रस्तुति, मंच सज्जा और आधुनिक तकनीक ने बांधा समां

प्रस्तुति को भव्य बनाने में 130 से अधिक कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने योगदान दिया। आकर्षक मंच सज्जा, प्रभावशाली प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक रंगमंचीय तकनीक ने प्रत्येक दृश्य को सजीव बना दिया। भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका में सौरभ राज जैन ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। वहीं, पूजा शर्मा ने महामाया और श्रीराधा के पात्रों को प्रभावी ढंग से निभाया। अर्पित रांका ने कंस और दुर्योधन की भूमिकाओं में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।

कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश ने किया भावुक, कर्तव्य पथ पर अडिग रहने का दिया संदेश

नाटक का सबसे प्रभावशाली पक्ष महाभारत के युद्ध और गीता उपदेश के दृश्य रहे। कुरुक्षेत्र में अर्जुन को कर्म, धर्म और कर्तव्य का महत्व समझाते श्रीकृष्ण के संवादों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। प्रस्तुति के माध्यम से संदेश दिया गया कि जीवन में परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए। धार्मिक प्रसंगों के साथ जीवन दर्शन को जोड़ती इस प्रस्तुति ने दर्शकों को श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ उनके उपदेशों से भी रूबरू कराया। ब्रजरज उत्सव में ‘मेरे कृष्ण’ की प्रस्तुति दर्शकों के लिए यादगार बन गई।

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