अंगद का रावण दरबार में पाव जमा कर शक्ति प्रदर्शन करना और लक्ष्मण मूर्छित के सीन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया

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रतिया: शक्ति नाटक क्लब रतिया द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा ग्राउंड,शक्ति नगर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में सोमवार रात्रि को रामलीला मंचन में अंगद का रावण दरबार में पाव जमा कर शक्ति प्रदर्शन करना और लक्ष्मण मूर्छित के सीन ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया सोमवार रात्रि को आयोजित रामलीला में मुख्य अतिथि के तहत नैना देवी लंगर कमेटी के चेयरमैन फतेह चंद सरदाना, अरोड़वंश सभा रतिया के पूर्व प्रधान अशोक ग्रोवर, पंजाबी सभा के कोषाध्यक्ष संजय मक्कड़, सीएम विंडो नॉमिनेट पर्सन अंजू जग्गा, प्रवीण जग्गा, पूर्व पार्षद प्रमोद कक्कड़, परम कंप्यूटर के संचालक योगेश चौधरी, दीपक नागपाल चंडीगढ़, गुरुद्वारा श्री दशमेश दरबार कमेटी के राजन ककड़ व अन्य सदस्य ,बजरंग दल कमेटी रतिया के विकास ग्रोवर,संजू जांगड़ा,मोहन मित्तल, प्रेम डोडा, धीरज तनेजा, आदर्श ग्रोवर ,प्रेम सेठी, अजय चुघ,संदीप अग्रवाल ने गणमान्य अतिथियों के तहत शिरकत की रामलीला मंचन में अंगद लंका के राजदरबार में पहुंचकर रावण को भगवान श्रीराम का संदेश सुनाते हैं। वे रावण को समझाते हैं कि माता सीता का हरण करना अधर्म है और उसे सीता को वापस कर भगवान श्रीराम से क्षमा मांग लेनी चाहिए।

रावण के घमंड और अंगद की खुली चुनौती 

रावण अपने बल, वैभव और विशाल सेना के घमंड में अंगद की बातों को अनसुना कर देता है। वह श्रीराम और उनकी वानर सेना का अपमान करता है। अंगद उसे चेतावनी देते हैं कि भगवान श्रीराम से शत्रुता करना उसके विनाश का कारण बनेगा।
रावण जब अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता है, तो अंगद उसे खुली चुनौती देते हैं और रावण के दरबार में अंगद अपना पांव जमा कर रावण को चुनौती देते हैं कि अगर किसी भी शुरू करने उसका पैर उठा दिया तो भगवान श्री राम की हार मानी जाएगी

अंगद-रावण संवाद और मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध

रामलीला में इस प्रसंग के दौरान अंगद और रावण के बीच तीखे संवाद, दरबारियों की चुनौती और पैर न हिला पाने का दृश्य दर्शकों में विशेष उत्साह पैदा करता है। वही बाद में लंका युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम की सेना और रावण की राक्षस सेना के बीच भीषण युद्ध होता है। रावण की ओर से उसका पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्रजीत भी कहा जाता है, युद्ध में उतरता है। वह मायावी शक्तियों और दिव्य अस्त्रों का ज्ञाता होता है।

मेघनाद युद्धभूमि में लक्ष्मण का सामना करता है। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होता है। लक्ष्मण जी वीरता से उसका मुकाबला करते हैं, लेकिन मेघनाद उन पर शक्तिशाली शक्ति बाण का प्रयोग करता है। शक्ति बाण लगने से लक्ष्मण जी मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ते हैं। श्रीराम का विलाप और भाई के प्रति प्रेम जब लक्ष्मण जी के प्राण संकट में पड़ जाते हैं, तब वैद्य सुषेण को बुलाया जाता है। वे बताते हैं कि लक्ष्मण जी को बचाने के लिए हिमालय के द्रोणगिरि पर्वत से विशेष औषधि, संजीवनी बूटी, लानी होगी। इसे सूर्योदय से पहले लाना आवश्यक होता है। यह कठिन कार्य हनुमान जी को सौंपा जाता है। भगवान श्रीराम के प्रति अपनी भक्ति और लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के संकल्प के साथ हनुमान जी तुरंत पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं।

हनुमान जी का संजीवनी के लिए पर्वत उठाना 

हनुमान जी का पर्वत उठाकर लाना रामलीला में हनुमान जी का पर्वत उठाकर आकाश मार्ग से लंका की ओर जाना सबसे आकर्षक दृश्यों में से एक होता है। इस दौरान संगीत, जयकारों और संवादों के माध्यम से हनुमान जी की अद्भुत शक्ति तथा प्रभु के प्रति उनकी निष्ठा का चित्रण किया जाता है।

लक्ष्मण की मूर्छा दूर और आर-पार युद्ध का ऐलान 

वैद्य सुषेण संजीवनी औषधि का प्रयोग करते हैं और लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर हो जाती है। उन्हें स्वस्थ देखकर भगवान श्रीराम, हनुमान जी और पूरी वानर सेना प्रसन्न हो उठती है और आर पार के युद्ध का ऐलान किया जाता है

रामलीला के 11वें दिन सम्मान समारोह  

रामलीला के 11वे दिन के संपन्न होने पर शक्ति नाटक क्लब के कमेटी प्रधान राजेश सेतिया ,रवि मिढा,अंशुल बत्रा, सचिन ललित , करनैल सिंह,अनिल रूखया, प्रिंस कालू तनेजा, शटी कक्कड़, रमेश जताना , विपुल मिढा, विजय तनेजा,दीपू चिलाना,आशु तनेजा,सोनू चिलाना,मनोहर लाल,टीटू तनेजा सहित समस्त कार्यकारिणी ने पटका पहनाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

Reported By: Rimpi Jindal

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