रामलीला मंचन में सरूपनखा की नाक काटने का मंचन किया गया

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हरियाणा: शक्ति नाटक क्लब रतिया द्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा ग्राउंड,शक्ति नगर में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में शुक्रवार रात्रि को रामलीला मंचन के आठवे दिन। रामलीला मंचन में सरूपनखा की नाक काटने का मंचन किया गया मदर इंडिया कान्वेंट स्कूल के प्रिंसिपल लोकेश खुराना , प्राइवेट स्कूल संघ के जिला अध्यक्ष व अपेक्स स्मार्ट स्कूल के डायरेक्टर जर्नलिस्ट शैलेंन्द्र रोमी गोस्वामी , राष्ट्रीय ग्रामीण शिक्षा रतिया के निदेशक  राजीव धमीजा निदेशक ने मुख्य अतिथि के तहत शिरकत की तथा गलमानया अतिथियों के तहत शीतला माता मंदिर कमेटी के अशोक सामरिया व उनकी टीम , शिवदल लंगर कमेटी के पुजारा लाल व अन्य टीम सदस्य, गवर्नमेंट हाई स्कूल लाली मनोज कुमार, सरदाना होम डेकोरेटर के संचालक मनोज सरदाना ,दीपक मोंगा, कन्नू मेहता,वेद कालड़ा,मोहन तनेजा सहित अन्य मौजूद रहे।

शूर्पणखा प्रसंग का मंचन

शुक्रवार रात्रि को रामलीला मंचन के तहत दिखाया गया कि भगवान श्री राम लक्ष्मण और सीता पंचवटी में विश्राम कर रहे होते हैं की कभी रावण की बहन शूर्पणखा वहां से निकलकर भ्रमण कर रही होती है तथा राम लक्ष्मण को देखकर उन पर मोहित हो जाती है व लक्ष्मण के पास जाकर उनसे विवाह का प्रस्ताव रखती है। लक्ष्मण भी विनोदपूर्ण ढंग से उसे श्रीराम के पास भेज देते हैं व इसी तरह का कर्म कई बार होता है रामलीला में इस प्रसंग को संवादों और हास्य के माध्यम से दिखाया जाता है, जिससे दर्शकों का मनोरंजन होता है। बार-बार अस्वीकार किए जाने पर शूर्पणखा क्रोधित हो जाती है। जब वह माता सीता को श्रीराम के साथ देखती है, तो उन्हें अपने रास्ते की बाधा समझने लगती है। क्रोध में वह अपना राक्षसी रूप धारण कर माता सीता पर हमला करने के लिए दौड़ती है। माता सीता भयभीत हो जाती हैं। श्रीराम तुरंत उन्हें बचाने के लिए आगे आते हैं और लक्ष्मण जी को शूर्पणखा को दंड देने का निर्देश देते हैं। लक्ष्मण भी क्रोधित होकर शूर्पणखा का नाक काट देते हैं।

शूर्पणखा का भाइयों और रावण के पास जाना

अपमानित और क्रोधित शूर्पणखा सबसे पहले अपने भाइयों खर-दूषण के पास पहुंचती है और उन्हें श्रीराम तथा लक्ष्मण से बदला लेने के लिए उकसाती है। इसके बाद खर-दूषण की सेना और श्रीराम के बीच युद्ध का प्रसंग आता है, जिसमें श्रीराम राक्षसों का वध करते हैं। बाद में शूर्पणखा लंका पहुंचकर रावण को पूरी घटना सुनाती है। माता सीता के सौंदर्य का वर्णन करते हुए वह रावण को उन्हें हरकर लाने के लिए उकसाती है। यही प्रसंग आगे चलकर स्वर्ण मृग, लक्ष्मण रेखा और माता सीता के हरण की घटनाओं की भूमिका तैयार करता है। मुख्य अतिथियों को शक्ति नाटक क्लब के कमेटी प्रधान राजेश सेतिया ,रवि मिढा,अंशुल बत्रा, सचिन ललित , करनैल सिंह,अनिल रूखया, प्रिंस कालू तनेजा, शटी कक्कड़, रमेश जताना ,विजय तनेजा,दीपू चिलाना,आशु तनेजा,सोनू चिलाना,मनोहर लाल,टीटू तनेजा सहित समस्त कार्यकारिणी ने पटका पहनाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

Reported By: Rimpi Jindal

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