रूस का बड़ा दांव, अमेरिकी F-35 को गिराने वाली मिसाइल होगी और खतरनाक, भारत के लिए क्यों अहम?

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नई दिल्ली: रूस अपने पुराने लेकिन भरोसेमंद पेचोरा S-125 एयर डिफेंस सिस्टम को नए सिरे से अपग्रेड करने जा रहा है। इस अपग्रेड के बाद यह सिस्टम स्थिर प्लेटफॉर्म से हटकर मोबाइल लॉन्चर बन जाएगा और ज्यादा आधुनिक व घातक हो जाएगा। खास बात है कि यही पेचोरा सिस्टम है जिसने 27 मार्च 1999 को कोसोवो युद्ध के दौरान सर्बिया में अमेरिका के स्टील्थ फाइटर F-117 नाइटहॉक को मार गिराया था। F-117 अमेरिका का पहला ऑपरेशनल स्टील्थ विमान था, इसलिए इस सिस्टम के अपग्रेड को भारत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के दो बड़े विरोधी चीन के पास पहले से स्टील्थ फाइटर हैं और पाकिस्तान भी जल्द इस ताकत को हासिल करने की तैयारी में है। ऐसे में पेचोरा का आधुनिक होना भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी रणनीतिक बढ़त हो सकता है।

पेचोरा क्या है?

पेचोरा सोवियत काल का छोटी से मध्यम दूरी का जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है। इसे 1961 में सोवियत संघ ने पेश किया था और भारतीय वायुसेना ने 1970 के दशक में इसे अपने बेड़े में शामिल किया था। इसकी मारक क्षमता 30 से 35 किलोमीटर तक है और यह 20 मीटर की नीची ऊंचाई से लेकर 25 किलोमीटर ऊंचाई तक उड़ रहे टारगेट को तबाह कर सकता है। इसे खासतौर पर कम और मध्यम ऊंचाई वाले लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने के लिए बनाया गया है।

इसमें 4R90 यागाटन रडार लगा है जो 100 किलोमीटर दूर तक दुश्मन का पता लगा लेता है। यह सिस्टम भारी जैमिंग वाले माहौल में भी काम कर सकता है, जीपीएस से लैस है और अकेले या पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क के साथ मिलकर ऑपरेट हो सकता है।

भारत पहले ही कर चुका है अपग्रेड

भारतीय वायुसेना इस सिस्टम का दशकों से इस्तेमाल कर रही है। करीब 50 साल पुराने इस सिस्टम को भारत ने पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बना दिया है। रक्षा मंत्रालय ने बेंगलुरु की कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को 16 पेचोरा सिस्टम अपग्रेड करने के लिए 591 करोड़ रुपये का ठेका दिया था, जिसका सफल परीक्षण पोखरण में हो चुका है।

अपग्रेड में पुराने वैक्यूम ट्यूब वाले एनालॉग सिस्टम को हटाकर आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स लगाए गए हैं, जिससे इसका रिस्पॉन्स टाइम काफी कम हो गया है। इसके रडार और गाइडेंस सिस्टम को डिजिटल किया गया है, नया ट्रांसमीटर, थर्मल इमेजिंग फायर कंट्रोल और स्वदेशी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो जोड़ा गया है। अब यह IACCS नेटवर्क से भी जुड़ा है।

रूस के नए मोबाइल अपग्रेड से क्या फायदा?

रूस अब इसे MZKT-8021, MZKT-8022 और MZKT-80211 चेसिस पर फिट करने जा रहा है। मोबाइल होने से भारत इसे सीमा पर तेजी से एक जगह से दूसरी जगह तैनात कर सकेगा। अभी फिक्स लोकेशन के कारण दुश्मन इसकी पोजीशन का पता लगा सकता है, लेकिन मोबाइल होने के बाद चीन और पाकिस्तान के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा।

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