नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुए कॉकपिट हमले को आतंकवादी हमला करार दिया है। यूएई के मुताबिक, ओमानी सह-पायलट ने कुल्हाड़ी से भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला किया और विमान को हाईजैक करने की कोशिश की थी। बता दें, यह घटना दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में हुई, जिसमें 182 यात्री सवार थे।
यूएई के बयान में कहा गया है कि उड़ान के दौरान को-पायलट ने अचानक कैप्टन पर हमला कर दिया और कॉकपिट पर कब्जा करने की कोशिश की। उस वक्त यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने बहादुरी दिखाते हुए बीच-बचाव किया और हमलावर को काबू में कर लिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। यूएई के वरिष्ठ राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने भी इसे X पर “खतरनाक आतंकवादी हमला” बताया है।
हमलावर की हुई पहचान
वहीं सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में हुई है। जांच से जुड़े तीन अधिकारियों और सऊदी चैनल अल अरबिया ने भी इसकी पुष्टि की है। अब उसके अतीत को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान ने पहले ही उसे चरमपंथी विचारों के शक में उड़ान ड्यूटी से हटा दिया था। उसे ओमान एयर में प्रशासनिक काम में लगा दिया गया था। बाद में वह रॉयल एयर मारोक में गया और फिर फ्लाईदुबई में नौकरी करने लगा। सवाल उठ रहा है कि इतनी गंभीर पृष्ठभूमि के बावजूद उसे फ्लाईदुबई ने कैसे नौकरी दी और उसकी कितनी जांच की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि अल-हम्मामी का जन्म यूएई में हुआ था और उसकी मां सीरियाई नागरिक है। उसका एक सोशल मीडिया अकाउंट घटना वाले दिन तक एक्टिव था, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उस अकाउंट पर अल-कायदा नेताओं की तस्वीरें थीं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
साजिश की जांच तेज
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या अल-हम्मामी ने अकेले यह हमला किया या उसका किसी आतंकी संगठन से संपर्क था। खाड़ी देशों के चार देशों की सुरक्षा एजेंसियां अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर जांच कर रही हैं।
इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि सह-पायलट इस्लामी कट्टरपंथ का शिकार हो गया था, जबकि एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसने पूछताछ में विमान को इजरायल में क्रैश करने की बात कही है। हालांकि जांचकर्ताओं ने अभी तक अंतिम मकसद का खुलासा नहीं किया है। यूएई इस पूरे मामले की जांच का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें इजरायल समेत कई देश शामिल हैं।











