नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुआ खौफनाक मंजर किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। कॉकपिट के अंदर भारतीय कैप्टन खून से लथपथ फर्श पर पड़े थे और को-पायलट विमान को क्रैश कराने की कोशिश में था। तभी एक यात्री ने हिम्मत दिखाकर न सिर्फ पायलट की जान बचाई, बल्कि 174 यात्रियों को भी मौत के मुंह से निकाल लिया।
यह घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 की है। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके ही ओमानी को-पायलट ने चाकू से हमला कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम का आंखों देखा हाल इजरायली यात्री यानिव हयून ने सुनाया है, जो उस वक्त अपनी बेटी नोआ के साथ सफर कर रहे थे।
प्लंबर यात्री ने देखा खौफनाक नजारा
यानिव पेशे से प्लंबर हैं। उन्होंने बताया कि हमले के वक्त वह कॉकपिट के पास पहुंचे तो दरवाजा खुला हुआ था। अंदर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल होकर गिरे हुए थे, जबकि को-पायलट प्लेन के कंट्रोल के साथ छेड़छाड़ कर रहा था। हयून ने बताया, “मुझे लगा कि विमान अब क्रैश होने वाला है। मैंने एक क्रू मेंबर के साथ मिलकर दरवाजे को धक्का दिया और अंदर घुस गया।”
अंदर पहुंचते ही हयून ने को-पायलट को पीछे से पकड़ा और उसे कंट्रोल से दूर खींच लिया। हमलावर पायलट ने विरोध किया और वापस कॉकपिट में घुसने की कोशिश की, लेकिन यात्रियों ने उसे बाहर खींच लिया।
‘आज तुम नहीं मरोगे’
हयून ने घायल कैप्टन को देखते ही कहा था, “आज तुम नहीं मरोगे।” उन्होंने बताया कि कॉकपिट में उस वक्त अफरातफरी मची थी। कुछ लोग कैप्टन की मदद कर रहे थे, तो कुछ को-पायलट को काबू में कर रहे थे। कुछ देर के लिए हयून ने खुद विमान के कंट्रोल को संभालने की कोशिश की, तब तक इकोनॉमी क्लास में यात्री के तौर पर सफर कर रहे दो ऑफ-ड्यूटी पायलट कॉकपिट में पहुंच गए और उन्होंने विमान का नियंत्रण संभाल लिया।
कैप्टन ही असली हीरो
हयून ने इंडिया टुडे से बातचीत में कैप्टन स्मित को असली हीरो बताया। उन्होंने कहा कि घायल होने के बावजूद कैप्टन ने सूझबूझ दिखाते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। अगर दरवाजा न खुलता तो कोई अंदर नहीं आ पाता और बड़ा हादसा हो जाता। “मैं सोच भी नहीं सकता कि इतने जख्मों के बाद भी उन्होंने हमलावर का सामना कैसे किया। अगर उन्होंने दरवाजा न खोला होता तो हम सब मर जाते,” हयून ने कहा। उन्होंने कैप्टन के जल्द ठीक होने की कामना की और कहा कि वह उनसे मिलकर व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद कहना चाहते हैं।












