नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगाने वाला ईरान का एक बड़ा प्रस्ताव आखिरकार खारिज हो गया है। ईरान ने अमेरिका के सामने 7 दिन का एक खास प्लान रखा था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई थी। लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे प्रस्ताव को नकार दिया है, और अधिकारियों के मुताबिक, नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू हो सकती है।
ईरान का यह प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। इसके तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए तैयार था, और साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर रुकी हुई बातचीत को फिर शुरू करने की भी पेशकश की गई थी। इसके बदले में ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं। पहली, ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए। दूसरी, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाए। और तीसरी, लेबनान को भी शामिल करते हुए एक व्यापक युद्धविराम लागू किया जाए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अमेरिका इन कदमों को चार से पांच दिनों में पूरा कर सकता था, जिसके बाद छठे दिन होर्मुज खुलता और सातवें दिन बातचीत दोबारा शुरू हो जाती।
अब ट्रंप ने क्या फैसला लिया
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने ईरान के इस पूरे प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। दरअसल ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान वाकई अपनी मांगों पर टिका रहेगा। यही वजह है कि उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों से कह दिया है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया है कि अगर हमला होता है, तो उसका स्तर कितना बड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप फिलहाल किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका के पास मौजूद हथियारों का घटता भंडार बताया जा रहा है। अमेरिका इन हथियारों को भविष्य में किसी और जरूरी मौके के लिए बचाकर रखना चाहता है, इसलिए फिलहाल जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने से बच रहा है।
ईरान बोला- अब फैसला अमेरिका का
ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अराघची ने पहले ही कहा था कि अब गेंद पूरी तरह अमेरिका के पाले में है। उनके मुताबिक, ईरान किसी भी तरह के दबाव, धमकी या डर के आगे अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रुख की भी सराहना की और बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने के समर्थन के लिए उनका आभार जताया।
फिलहाल स्थिति यह बनी हुई है कि ईरान ने शांति का एक रास्ता सुझाया था, लेकिन ट्रंप ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप को ईरान की नीयत पर पूरा भरोसा नहीं है, और इसी बीच मिडटर्म चुनाव के बाद दोबारा बमबारी की आशंका भी सामने आ गई है। यानी यह पूरा मामला अभी बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच अधर में लटका हुआ है। आने वाले दिनों में ट्रंप का रुख क्या रहता है, उसी से यह तय होगा कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।












