नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के सत्र 2026-27 के चुनाव के लिए कैंपस में सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। देश के सबसे प्रतिष्ठित छात्र राजनीति के इस महाकुंभ में इस बार भी मुख्य रूप से त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। सुबह से ही विभिन्न कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की भीड़ अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए उमड़ रही है, जिससे विश्वविद्यालय का माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में ढल गया है।
मतदान की समय-सारणी और मतगणना व्यवस्था
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए समय निर्धारित किया है। डे कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक वोट डालने की व्यवस्था की गई है, जबकि इवनिंग कॉलेज के छात्र दोपहर 3:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक अपना वोट डाल सकेंगे।
मतदान संपन्न होने के बाद सभी मशीनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा, जहां 19 सितंबर को नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में वोटों की गिनती की जाएगी और नतीजों का ऐलान होगा।
सुरक्षा, ईवीएम और यातायात के कड़े प्रबंध
इस बड़े चुनावी आयोजन को निष्पक्ष और बिना किसी रुकावट के पूरा कराने के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का बंदोबस्त किया गया है। इनमें से 960 ईवीएम सीधे मतदान केंद्रों पर इस्तेमाल की जा रही हैं, जबकि 40 मशीनों को किसी भी आपात स्थिति के लिए रिजर्व रखा गया है।
किसी भी तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत दूर करने के लिए 12 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए छात्रा मार्ग, प्रोबिन रोड और यूनिवर्सिटी रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह बंद रखी गई है।
चुनावी हलचल के बीच उठे प्रमुख मुद्दे
यह चुनाव सिर्फ नियमित छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि हाल की घटनाओं ने इसमें नए मुद्दे जोड़ दिए हैं। सत्या निकेतन में हुए हादसे, जिसमें सात लोगों की जान चली गई थी, के बाद से हॉस्टल और पीजी सुरक्षा का सवाल सबसे प्रमुखता से उठ रहा है। इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलनों की गूंज भी विद्यार्थियों के रुख को प्रभावित कर रही है।
मुख्य दावेदार और उनके प्रमुख चेहरे
चारों केंद्रीय पदों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—पर कब्जा जमाने के लिए एबीवीपी (ABVP), एनएसयूआई (NSUI) और आइसा-एसएफआई (AISA-SFI) गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला है। एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए इशू मौर्य, सचिव के लिए रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव के लिए एशियाई खेलों के हैंडबॉल खिलाड़ी लक्ष्य राज सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं एनएसयूआई की तरफ से अध्यक्ष पद पर विजय शंकर मीणा, उपाध्यक्ष पद पर वीर छत्रथ, सचिव पद पर नम्रता चौधरी और संयुक्त सचिव पद पर गोपाल चौधरी किस्मत आजमा रहे हैं।
पिछले नतीजों और वर्चस्व की तस्वीर
अगर बीते आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चुनाव (2025) में एबीवीपी ने अध्यक्ष पद समेत तीन सीटों पर कब्जा जमाया था, जिसमें आर्यन मान अध्यक्ष चुने गए थे, जबकि एनएसयूआई के राहुल झांसला ने उपाध्यक्ष पद जीता था। पिछले एक दशक में एबीवीपी ने 6 बार अध्यक्ष पद जीतकर अपना दबदबा बनाए रखा है।











