यौन उत्पीड़न मामला: तरुण तेजपाल ने गोवा पुलिस के सामने किया सरेंडर, अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं निगाहें

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Tarun Tejpal
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नई दिल्ली: वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में कानूनी विकल्पों की राह तलाश रहे तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को आखिरकार सलाखों के पीछे जाना पड़ा है। सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल कोई राहत न मिलने और पूर्व में जारी निर्देशों का पालन करते हुए 62 वर्षीय पत्रकार ने सोमवार को गोवा में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के तुरंत बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें बरदेज़ स्थित कोलवाले जेल भेज दिया गया। यह नाटकीय घटनाक्रम बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाए जाने के कुछ ही हफ्तों बाद सामने आया है।

कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प

जेल जाने की प्रक्रिया के दौरान पूर्व संपादक का रुख अब भी आक्रामक नजर आया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस कानूनी फैसले से पीछे नहीं हटेंगे और शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी न्याय की गुहार जारी रखेंगे। 
मीडिया से बातचीत में उन्होंने दोहराया कि उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ वे सर्वोच्च न्यायालय में पुरजोर तरीके से अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद फैसला

यह पूरा घटनाक्रम 25 अगस्त को आए सर्वोच्च न्यायालय के उस महत्वपूर्ण आदेश की कड़ी है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि सजा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से पहले तेजपाल को जेल जाना होगा। शीर्ष अदालत ने राहत की मांग वाली उनकी अंतरिम याचिका खारिज करते हुए उन्हें दो हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने की सख्त ताकीद की थी। 

न्यायालय ने अपने आदेश में यह शर्त रखी थी कि जब तक समर्पण प्रमाण पत्र दाखिल नहीं किया जाता, तब तक उनकी मुख्य याचिका पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। इसी आदेश के अनुपालन की अंतिम समय-सीमा 22 सितंबर तय की गई थी, जिसके दबाव में तेजपाल को आत्मसमर्पण का यह कदम उठाना पड़ा।

सेशन कोर्ट के फैसले से हाई कोर्ट की सजा तक

इस मामले ने उस वक्त बड़ा मोड़ लिया जब 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने निचली अदालत के पुराने फैसले को खारिज कर दिया। साल 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर तेजपाल को बरी कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें 2013 में एक रिसॉर्ट होटल की लिफ्ट में कनिष्ठ सहकर्मी के साथ बलात्कार का दोषी माना। कोर्ट ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। यद्यपि शुरुआत में हाई कोर्ट ने ऊपरी अदालत जाने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी थी, पर बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर समर्पण की शर्त अनिवार्य कर दी गई।

लंबी कानूनी प्रक्रिया और सरकार का रुख

नवंबर 2013 में दर्ज हुए इस मामले में तेजपाल को पहले भी लगभग एक साल जेल में बिताना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली थी। वहीं दूसरी ओर, गोवा सरकार इस मामले में और कड़ा रुख अपनाए हुए है। राज्य सरकार ने तेजपाल की 10 साल की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अलग से याचिका दायर की है। अब सभी निगाहें 22 सितंबर की तय तिथि और सुप्रीम कोर्ट के भावी रुख पर टिकी हैं।

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