नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मानसून के मौसम के साथ ही डेंगू का खतरा एक बार फिर गहराने लगा है। खासकर राजधानी कोलकाता और आसपास के इलाकों में सुबह की शुरुआत सिर्फ बच्चों की स्कूली यूनिफॉर्म और किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अभिभावक बच्चों को मच्छरदानी से निकालने के साथ ही मॉस्किटो रिपेलेंट लगाने में व्यस्त नजर आ रहे हैं। राज्य में लगातार सामने आ रहे डेंगू के मामलों ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा और व्यावहारिक फैसला लेते हुए सितंबर से नवंबर तक स्कूलों की तय वर्दी में ढील देने का सुझाव दिया है। इस पहल का सीधा मकसद सुबह और दिन के समय सक्रिय रहने वाले डेंगू के मच्छरों से मासूम बच्चों का बचाव करना है।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में लिया गया निर्णय
यह फैसला किसी अचानक बनी योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय ‘स्वास्थ्य भवन’ में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक का नतीजा है। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने डेंगू के मौजूदा प्रसार और आगामी महीनों के जोखिम पर विस्तार से मंथन किया। समीक्षा के बाद सामने आया कि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा डाले बिना उन्हें इस मौसमी बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है, बशर्ते कपड़ों के स्तर पर थोड़ी अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। इसी आधार पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे आने वाले तीन महीनों में स्कूल यूनिफॉर्म की औपचारिकता से ऊपर उठकर बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दें।
मोजे पहनने से नहीं मिलेगी सुरक्षा
डेंगू से सुरक्षा के नाम पर कई स्कूलों ने पहले ही बच्चों को घुटनों तक मोजे पहनकर आने के निर्देश दिए थे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरीके को सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल नाकाफी करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे मोजे त्वचा से पूरी तरह चिपके रहते हैं, जिसे आसानी से भेदकर मच्छर काट लेते हैं। असली सुरक्षा मोजों से नहीं, बल्कि पूरे शरीर को ढकने वाले ढीले-ढाले कपड़ों से ही संभव है।
जारी होंगे नए निर्देश
सरकार जल्द ही इस ढील को लेकर एक औपचारिक सर्कुलर जारी करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लड़कों को फुल शर्ट और फुल पैंट पहनने की अनुमति होगी। वहीं, जो छात्राएं नियमित रूप से स्कर्ट पहनकर स्कूल आती हैं, वे अपने पैरों को पूरी तरह से ढकने वाले सलवार सूट या पैंट का इस्तेमाल कर सकेंगी। राज्य सरकार ने निजी स्कूलों के प्रबंधन से भी इस व्यवस्था को अपने परिसरों में लागू करने का अनुरोध किया है। हालांकि, निजी संस्थानों में अंतिम फैसला उनके अपने प्रशासनिक बोर्ड का ही रहेगा, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सभी संस्थान इस पहल का समर्थन करेंगे।












