नई दिल्ली: नशे के काले कारोबार पर कानून का शिकंजा एक बार फिर कस गया है। कार के स्पीकर सिस्टम में चरस छिपाकर तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को रूपनगर की विशेष अदालत ने 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) चंडीगढ़ आंचलिक इकाई की प्रभावी कार्रवाई और अभियोजन की पैरवी के बाद अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल छह लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला एनसीबी अपराध संख्या 46/2021 से संबंधित है। दोषियों की पहचान पटियाला जिले के नाभा निवासी कुलदीप सिंह उर्फ गोलू और संजीव कुमार उर्फ मिठू तथा अशोक कुमार निवासी पटियाला/चंडीगढ़ के रूप में हुई है।
कार के स्पीकर में छिपाई थी 3.650 किलो चरस
एनसीबी को मिली पुख्ता सूचना के आधार पर एक जुलाई 2021 को चंडीगढ़ आंचलिक इकाई की टीम ने पंजाब के रूपनगर जिले में मोरिंडा के पास सरहिंद-पटियाला मार्ग पर निगरानी शुरू की। सूचना के अनुरूप एक मारुति ऑल्टो कार को रोककर तलाशी ली गई। जांच के दौरान कार की डिक्की में लगे स्पीकर सिस्टम से गोल और उंगलीनुमा आकार के सात पैकेट बरामद हुए। इन पैकेटों में कुल 3.650 किलोग्राम चरस छिपाई गई थी जो स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत वाणिज्यिक मात्रा की श्रेणी में आती है। कार में सवार तीनों आरोपियों को मौके पर गिरफ्तार कर लिया गया था।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
विशेष न्यायालय रूपनगर की न्यायाधीश लुखविंदर कौर दुग्गल ने 21 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में तीनों आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20(सी) और धारा 29 के साथ धारा 20 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने 22 अक्टूबर को सजा सुनाते हुए प्रत्येक दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास का दंड दिया।
प्रत्येक दोषी पर धारा 20(सी) के तहत एक लाख रुपये और धारा 29 के साथ धारा 20 के तहत एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक संबंधित जुर्माने के लिए दो-दो वर्ष के अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान किया गया है। दोनों मुख्य सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने तस्करी में इस्तेमाल वाहन की जब्ती की कार्यवाही शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं।
नशामुक्त भारत के संकल्प के साथ एनसीबी की अपील
एनसीबी ने नशामुक्त भारत के लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए नागरिकों से नशीले पदार्थों की तस्करी की सूचना देने की अपील की है। इसके लिए राष्ट्रीय मादक पदार्थ हेल्पलाइन 1933 पर निःशुल्क संपर्क किया जा सकता है। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।











