बिहार में NDA को बड़ा फायदा, राज्यसभा का गणित साफ

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नई दिल्ली: मार्च 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों ने सियासी हलचल तेज कर दी है. अगले माह 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होना है, जहां मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दल बढ़त की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं. इन चुनावों का असर राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम माना जा रहा है.

इस वर्ष कुल 72 राज्यसभा सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें से 16 मार्च 2026 को 37 सीटों के लिए मतदान होगा. राज्यसभा सदस्यों का चुनाव संबंधित राज्यों के विधायक करते हैं. मौजूदा समीकरणों के अनुसार भाजपा को तीन और उसके सहयोगी दलों को दो अतिरिक्त सीटों का लाभ मिल सकता है, जिससे विपक्ष को झटका लगने की संभावना है.

किन नेताओं का पूरा हो रहा कार्यकाल

इन चुनावों में कई सीनियर नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है. इनमें शरद पवार, हरिवंश नारायण सिंह, राम नाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा, रामदास अठावले, एम. थंबीदुरई, प्रियंका चतुर्वेदी, प्रेम चंद गुप्ता और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे नाम शामिल हैं.

बिहार में NDA को सबसे ज्यादा फायदा

बिहार में पांच सीटें खाली हो रही हैं. इनमें जदयू की दो, राजद की दो और आरएलएम की एक सीट शामिल है. यहां एक सीट जीतने के लिए 42 विधायकों के वोट जरूरी हैं. राजग के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसके चार सीट जीतने की स्थिति मजबूत है.

विपक्ष के पास 42 का आंकड़ा नहीं है. ऐसे में समीकरणों के अनुसार राजग पांचवीं सीट भी जीत सकता है. चुनावी परिस्थिति में विपक्ष के लिए राजग के विधायकों में सेंध लगाना आसान नहीं माना जा रहा है.

असम और छत्तीसगढ़ का गणित

असम में तीन सीटें खाली हो रही हैं. इनमें दो भाजपा और एक निर्दलीय सांसद की सीट है. इस बार दो भाजपा और एक कांग्रेस उम्मीदवार के जीतने की संभावना जताई जा रही है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के दोनों सांसद रिटायर हो रहे हैं. चुनाव के बाद यहां भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलने के आसार हैं.

हरियाणा और हिमाचल में बदलाव

हरियाणा में दो सीटें खाली हो रही हैं, जो भाजपा के पास थीं. चुनाव के बाद भाजपा को एक और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है.

हिमाचल प्रदेश में भाजपा की एक सीट रिक्त हो रही है और यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है.

महाराष्ट्र में सात सीटों पर बड़ा मुकाबला

महाराष्ट्र में सात सीटें खाली हो रही हैं. इनमें भाजपा की दो, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की एक, राकांपा (शरद पवार) की दो, कांग्रेस की एक और रिपब्लिकन पार्टी की एक सीट शामिल है.

चुनाव के बाद भाजपा को तीन सीटें, राकांपा (अजित पवार) को एक, शिवसेना (शिंदे) को एक और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना है. भाजपा चाहे तो आरपीआई को भी एक सीट दिला सकती है. यहां शरद पवार के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है.

ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना

ओडिशा में चार सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें दो भाजपा और दो बीजद की हैं. यहां दोनों दलों के दो-दो सीट जीतने की संभावना है.

तमिलनाडु में छह सीटें रिक्त हो रही हैं. इनमें चार द्रमुक, एक टीएमसी और एक अन्नाद्रमुक की सीट है. द्रमुक चार सीटें फिर से जीत सकती है, अन्नाद्रमुक एक सीट हासिल कर सकती है, जबकि एक सीट का फैसला स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

तेलंगाना में दो सीटें खाली हो रही हैं.एक कांग्रेस और एक बीआरएस की. इस बार दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है.

पश्चिम बंगाल में तृणमूल की बढ़त

पश्चिम बंगाल से पांच सीटें रिक्त हो रही हैं. इनमें चार तृणमूल कांग्रेस और एक माकपा के पास थी. मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार तृणमूल कांग्रेस चार सीटें बरकरार रख सकती है, जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है.

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