नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद और लेखक शशि थरूर ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री एल. के. आडवाणी की 98वीं जन्मदिन पर उनकी तारीफ की, जिसमें उन्होंने आडवाणी के सार्वजनिक जीवन और सेवा को सराहा. थरूर ने आडवाणी को “सच्चा राजनेता” और “जन सेवा में निष्ठावान” बताया. उन्होंने कहा कि आडवाणी का सार्वजनिक जीवन आधुनिक भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और उनकी विनम्रता और शिष्टाचार भी उदाहरणीय हैं.
रथ यात्रा का समर्थन कर रहे थरूर
दरअसल, थरूर की इस टिप्पणी के बाद सवाल उठे कि क्या वह आडवाणी के 1990 के रथ यात्रा अभियान का समर्थन कर रहे हैं, जिसे राम जन्मभूमि आंदोलन के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है. इस यात्रा को बाबरी मस्जिद विध्वंस की पूर्व-घटना माना जाता है, जो 1992 में हुआ और जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब राम मंदिर का निर्माण हुआ.
जीवन केवल रथ यात्रा तक सीमित नहीं
शशि थरूर ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि किसी नेता के पूरे जीवन और योगदान को केवल एक घटना के आधार पर आंका जाना न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने उदाहरण के तौर पर जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का उल्लेख किया, जिनके राजनीतिक करियर को केवल चीन युद्ध की विफलता या आपातकाल के आधार पर नहीं मापा जा सकता. थरूर ने कहा, “हम वही समान दृष्टि आडवाणी जी पर भी लागू करें. उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को केवल रथ यात्रा की घटना तक सीमित करना अनुचित होगा.”
व्यक्तिगत विचार व्यक्त कर रहे थरूर
कांग्रेस ने हालांकि इस मामले में दूरी बनाई है. कांग्रेस मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने स्पष्ट किया कि थरूर अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त कर रहे हैं और पार्टी की आधिकारिक स्थिति को यह प्रतिबिंबित नहीं करता. उन्होंने कहा कि थरूर का यह स्वतंत्र बयान कांग्रेस की लोकतांत्रिक और उदार भावना को दर्शाता है.
आडवानी के योगदान को व्यापक दृष्टिकोण से देखें
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि थरूर के इस बयान से कांग्रेस और बीजेपी के बीच संवेदनशील राजनीतिक विषय पर अंतर-संबंधित बहस फिर से सामने आई है. जबकि थरूर ने आडवाणी के योगदान को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की बात कही, पार्टी ने खुद को इस विवाद से अलग रखा. यह स्थिति कांग्रेस के भीतर विचारों की विविधता और पार्टी के उदारतापूर्ण दृष्टिकोण को भी उजागर करती है.
थरूर का बयान यह भी दिखाता है कि भारतीय राजनीति में इतिहास और घटनाओं को अलग दृष्टिकोण से देखने का महत्व कितना है, और नेताओं के व्यक्तित्व एवं उनके सार्वजनिक योगदान को केवल विवादास्पद घटनाओं तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए.















