जेल में बंद कार्यकर्ता उमर खालिद की दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर दी. इसके बाद उमर खालिद ने अपने सह-आरोपी को जमानत मिलने पर खुशी जताई. उनकी साथी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर यह जानकारी साझा की. लाहिड़ी ने लिखा, “जेल ही अब मेरा जीवन है और खालिद के भावनात्मक शब्दों का जिक्र किया कि उन्होंने उन सभी आरोपियों के लिए खुशी जताई जिन्हें जमानत मिली.
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से इनकार किया
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है. हालांकि, पांच अन्य कार्यकर्ताओं गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत मिली.
लाहिड़ी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खालिद ने कहा, “मुझे उन सभी लोगों के लिए बहुत खुशी है जिन्हें जमानत मिल गई! बहुत राहत मिली.” उन्होंने जेल में होने वाली अपनी अगली बैठक में शामिल होने का भी संकेत दिया, जिसमें खालिद ने कहा, “अच्छा अच्छा, आ जाना. अब यही जिंदगी है.”
फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे
गौरतलब है कि मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए. पुलिस ने खालिद और अन्य आरोपियों पर इस घटना की साजिश रचने का आरोप लगाया, जबकि खालिद लगातार अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते रहे हैं. मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है, लेकिन खालिद ने अब तक लगभग पांच साल जेल में बिताए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुकदमे में देरी जमानत के लिए आधार नहीं बन सकती. सभी सात आरोपियों पर दंगों के कथित मास्टरमाइंड होने के आरोप हैं और उन्हें कठोर आतंकवाद-विरोधी धारा UAPA और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत केस दर्ज किया गया है.
परिवार ने जताई निराशा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने गहरी निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. फैसला आ चुका है और मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है. परिवार और समर्थक खालिद की न्यायिक लड़ाई के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं.















