नई दिल्ली: यूपीएससी सिविल सेवा प्रीलिम्स परीक्षा को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। शुरुआत में अगस्त महीने में सिर्फ 8 सवालों पर सवाल उठे थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 27 सवालों तक पहुंच गया है। उम्मीदवारों का दावा है कि जनरल स्टडीज और एप्टीट्यूड पेपर में दिए गए कई जवाब या तो गलत हैं, या उनका कोई सही विकल्प मौजूद ही नहीं है, या फिर एक से ज्यादा उत्तर सही नजर आ रहे हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम दो अलग-अलग ग्रुप ने इन सवालों को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल यानी CAT में चुनौती दी है। चार उम्मीदवारों वाले पहले ग्रुप ने आठ सवालों पर आपत्ति जताई थी, जबकि 63 उम्मीदवारों वाले दूसरे ग्रुप ने कुल 27 सवालों को चुनौती दी है, जिसमें पहले वाले आठ सवाल भी शामिल हैं। वकील शांतनु जुगतावत के जरिए सचिन तिवारी और अन्य अभ्यर्थियों ने पहले भी इस मामले में याचिका दाखिल की थी।
कहां-कहां बताई जा रही हैं गलतियां
उम्मीदवारों के मुताबिक कुछ सवालों में तथ्यात्मक चूक है, तो कुछ जवाब सरकारी दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। Zero FIR से जुड़े सवाल में हिंदी और अंग्रेजी वर्जन में अलग-अलग शब्दों के इस्तेमाल से भ्रम पैदा होने का आरोप है। इसके अलावा ग्रैंड स्लैम नियमों और ऋग्वैदिक काल से जुड़े सवालों में भी आधिकारिक तथ्यों से विरोधाभास बताया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कुछ सवालों में दिए गए चारों विकल्पों में से कोई भी सही नहीं है।
8 अक्टूबर को होगी अहम सुनवाई
बार-बार शिकायत के बावजूद जब आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं मिला, तो उम्मीदवारों ने ट्रिब्यूनल का रुख किया। CAT ने अब यूपीएससी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है और दोनों याचिकाओं पर एक साथ 8 अक्टूबर को सुनवाई तय की गई है। अगर सुनवाई में कुछ सवाल गलत साबित होते हैं, तो इसका सीधा असर सैकड़ों उम्मीदवारों के स्कोर पर पड़ सकता है।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी CAT का गठन संविधान के अनुच्छेद 323-A के तहत प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत हुआ था। यूपीएससी की चयन प्रक्रिया से जुड़े विवादों की सुनवाई हाईकोर्ट की बजाय सीधे इसी ट्रिब्यूनल में होती है।












